Sharabi Shayari

पीता था शराब मैं उसने दी छुड़ा

पीता था शराब मैं, उसने दी छुड़ा अपनी कसम देकर, जब गया महफ़िल में मैं, तो दोस्तों ने पीला दी उसी की कसम देकर !!!

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Sharabi Shayari

पी चुके हैं शराब हम हर गली

पी चुके हैं शराब हम हर गली हर दूकान से, एक रिश्ता सा बन गया है शराब के ज़ाम से, पाये हैं ज़ख्म हमने इश्क़ में ऐसे, कि नफ़रत सी हो गयी है हमें इश्क़ के नाम से !!

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Sharabi Shayari

मोहब्बत भी उस मोड़ पे पहुँच चुकी है

मोहब्बत भी उस मोड़ पे पहुँच चुकी है, कि अब उसको प्यार से भी मेसेज करो, तो वो पूछती है कितनी पी है…!!!

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Sharabi Shayari

या खुदा दिल तो तुडवा दिया तूने इश्क

या खुदा ‘दिल’ तो तुडवा दिया तूने इश्क के चक्कर में, कम से कम ‘लीवर’ तो संभालना दारु पीने के लिए

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Sharabi Shayari

मेरी कबर पे मत गुलाब लेके आना

मेरी कबर पे मत गुलाब लेके आना न ही हाथों में चिराग लेके आना प्यासा हूँ मैं बरसो से जानम बोतल शराब की और एक गिलास लेके आना

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Sharabi Shayari

पीके रात को हम उनको भुलाने लगे

पीके रात को हम उनको भुलाने लगे, शराब में गम को मिलाने लगे, दारू भी बेवफा निकली यारों, नशे में तो वो और भी याद आने लगे…

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Sharabi Shayari

रात चुप है मगर चाँद खामोश नहीं

रात चुप है मगर चाँद खामोश नहीं, कैसे कहूँ आज फिर होश नहीं, इस तरह डूबा हूँ तेरी मोहब्बत की गहराई में, हाथ में जाम है और पीने का होश नहीं..

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